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BJP के बाद कांग्रेस के लिए टेंशन बने शत्रुघ्न, पार्टी धर्म पर पत्नी धर्म को तरजीह

राजनीति May 03, 2019       648
BJP के बाद कांग्रेस के लिए टेंशन बने शत्रुघ्न, पार्टी धर्म पर पत्नी धर्म को तरजीह

द करंट स्टोरी। बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस का दामन थामने वाले शत्रुघ्न सिन्हा लखनऊ सीट पर पार्टी से ज्यादा पत्नी धर्म को तरजीह दे रहे हैं. इसीलिए कांग्रेस के बजाय सपा के उम्मीदवार पूनम सिन्हा का प्रचार कर रहे हैं. इससे कांग्रेस उम्मीदवार की नाराजगी बढ़ गई है.

बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस का दामन थामने वाले शत्रुघ्न सिन्हा बिहार के पटना साहिब सीट से मैदान में हैं और उनकी पत्नी पूनम सिन्हा समाजवादी पार्टी से लखनऊ के रणभूमि में उतरी हैं. शत्रुघ्न के सामने एक तरफ पार्टी धर्म है तो दूसरी तरफ पत्नी धर्म. ऐसे में वो पार्टी से ज्यादा पत्नी धर्म को अहमियत देते नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि पहले पूनम सिन्हा के नामांकन में लखनऊ में रोड शो किया और अब कांग्रेस के खिलाफ व सपा के पक्ष में पत्नी के लिए वोट मांगने उतरे हैं.

लखनऊ लोकसभा सीट पर राजनाथ के खिलाफ सपा ने हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मैदान में हैं और कांग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में गुरुवार को शत्रुघ्न सिन्हा ने पूनम सिन्हा के पक्ष में प्रचार करने उतरे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मंच साझा कर कांग्रेस के खिलाफ वोट मांगा. इतना ही नहीं उन्होंने अखिलेश यादव और बसपा अध्यक्ष मायावती की जमकर तारीफ की.

सपा प्रत्याशी पूनम सिन्हा के लिए शत्रुघ्न सिन्हा के द्वारा प्रचार करना कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम को नागवार गुजरा.  उन्होंने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 'शत्रुघ्न सिन्हा की हरकतों से लगता है कि उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन तो कर ली है, मगर अभी तक RSS से इस्तीफा नहीं दिया है.' आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शत्रुघ्न को सीधे तौर पर संघ के खेमें में खड़ा कर दिया है.

दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा इससे पहले पूनम सिन्हा के नामांकन में भी शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने लखनऊ में रोड शो भी किया था. यही नहीं इस दौरान शत्रुघ्न ने कहा था कि प्रधानमंत्री हो तो अखिलेश यादव या मायावती जैसा हो, जिनके अंदर काबिलियत और काम करने की तत्परता है. अखिलेश यादव में बहुत क्षमताएं और युवा शक्ति के प्रतीक हैं. उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया है. मैं उन्हें सिर्फ उत्तर प्रदेश के भविष्य नहीं बल्कि कभी-कभी तो देश के भविष्य के रूप में भी देखता हूं और प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखता हूं.

जबकि कांग्रेस की और से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है. राहुल गांधी भी कई बार खुलकर प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं. ऐसे शत्रुघ्न का सपा के लिए प्रचार करना और प्रधानमंत्री के लिए अखिलेश को उपयुक्त बताना कांग्रेसियों को नागवार गुजर रहा है.

लखनऊ से कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, 'शत्रुघ्न सिन्हा अपनी पत्नी के प्रचार के लिए आए हैं, मेरा उनसे कहना है कि वो पार्टी धर्म निभाएं और मेरे लिए भी एक दिन चुनाव प्राचर करें.' हालांकि शत्रुघ्न ने आचार्य प्रमोद कृष्णम की बात को अहमियत नहीं दिया है. यही वजह है कि वो दोबारा से लखनऊ में कांग्रेस के खिलाफ रैली कर सपा के लिए वोट मांग रहे हैं.

दिलचस्प बात है कि शत्रुघ्न सिन्हा 2014 के बाद से इसी तरह से बीजेपी में रहते हुए पार्टी को असहज करते रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं और विपक्ष के नेताओं के साथ सुर में सुर मिला रहे थे. इसी के चलते पार्टी ने उनका टिकट काटकर पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया. इसी के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और पटना साहिब सीट से चुनावी मैदान में हैं और उनकी पत्नी पूनम सिन्हा सपा से लखनऊ की प्रत्याशी हैं. शत्रुघ्न का पत्नी के पक्ष में प्रचार करना कांग्रेस के उम्मीदवार के लिए गले की फांस बन गया है.

 

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