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क्या RVNL लेना चाहता है यात्रियों की जान, ट्रेन चलती तो लग जाता 25 हजार वॉट का करंट

Exclusive Jul 30, 2019       770
क्या RVNL लेना चाहता है यात्रियों की जान, ट्रेन चलती तो लग जाता 25 हजार वॉट का करंट

एक बार फिर, RVNL भोपाल ने यात्रियों की सुरक्षा रखी ताक पर
दो सौ से ज्यादा खंबों की मिट्टी कटी, घटिया निर्माण की बारिश ने खोली पोल

प्रवेश गौतम, भोपाल। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा ताक पर रख दी है। इटारसी से हबीबगंज स्टेशन के बीच बन रही तीसरी रेल लाइन के निर्माण में लगातार लापरवाही सामने आ रही है। इसी साल अप्रैल में रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर (सीआरएस) एके जैन ने भी अपने निरीक्षण में ऐसे ही घटिया निर्माण का उल्लेख किया था। हाल ही में हुई 15 दिन की बारिश ने तीसरी रेल लाइन के घटिया निर्माण की न केवल पोल खोल दी है बल्कि यह भी प्रमाणित किया है कि कैसे RVNL अधिकारियों की मिलीभगत के चलते लाखों यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

दरअसल, इटारसी के नजदीक पवारखेड़ा से होशंगाबाद स्टेशन के बीच में बनी तीसरी रेल लाइन के किनारे लगे बिजली के खंबों (ओएचई मास्ट) की नींव में बारिश के पानी से कटाव हो गया है। जिससे यह बात स्वत: ही सामने आ गई है कि इन खंबों के निर्माण में सुरक्षा मानकों सहित कई प्रकार की गड़बड़ियां की गई हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस सेक्शन को पूरा बताकर RVNL ने इसको रेलवे को सौंप भी दिया है। वहीं सीआरएस ने भी इसके घटिया निर्माण का उल्लेख तो किया लेकिन साथ ही इस सेक्शन को मंजूरी भी दे दी थी।

रेलवे से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने द करंट स्टोरी को जानकारी देते हुए बताया कि इन खंबों के निर्माण में कई प्रकार की लापरवाही जानबूझकर की गई है। निर्माण के दौरान खंबों की नींव बनाते समय तय मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह है कि पहली बारिश में ही खंबों की नींव हिल गई। ऐसे में यदि इस ट्रेक पर ट्रेन का संचालन होता तो ट्रेन की रफ्तार से होने वाले कंपन को यह खंबे झेल नहीं पाते और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।

पहले भी खंबे हो चुके हैं टेढ़े
द करंट स्टोरी ने दिसंबर 2018 में ' तीसरी रेल लाइन: 200 खंभे टेढ़े, RVNL में भ्रष्टाचार की आशंका ' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि कैसे अधिकारियों द्वारा लापरवाही करके इन खंबों का निर्माण कराया गया है। जिसके चलते दो सौ से ज्यादा खंबे टेढ़े हो गए थे। हालांकि खबर प्रकाशित होने के बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लेते हुए ठेकेदार को दोबार खंबों का निर्माण करने के आदेश दिए थे।

12 साल से टिके हैं भोपाल में
कहने को तो रेलवे में नियम है कि संवेदनशील पदों पर कोई भी अधिकारी तीन साल से ज्यादा नहीं रह सकता। लेकिन RVNL भोपाल में यह नियम ताक पर रख दिए गए हैं। तीसरी रेल लाइन के निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारी पिछले लगभग 12 वर्षों से भोपाल में जमे हुए हैं। वर्तमान में यह अधिकारी ईडी के पद पर हैं। RVNL में ईडी का पद संभालने वाले सभी अधिकारी नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में बैठते हैं, लेकिन भोपाल में अंगद के पांव की तरह जमे हुए इन जनाब ने ईडी के पद को भोपाल में स्थानांतरण करवा लिया था। इसी का नतीजा है कि तीसरी रेल लाइन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में लगातार भ्रष्टाचार सहित कई प्रकार की लापरवाही सामने आ रही है।

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