• Sunday, October 25, 2020
Breaking News

युवाओं को भाजपा जिला अध्यक्ष बनाने के निर्णय का 'स्वॉट अनालिसिस'

आलेख May 17, 2020       1009
युवाओं को भाजपा जिला अध्यक्ष बनाने के निर्णय का 'स्वॉट अनालिसिस'

प्रवेश गौतम। हाल ही में मप्र भाजपा ने दो दर्जन जिला अध्यक्षों की घोषणा की, जिनमें से दो को छोड़कर ज्यादातर युवा हैं। इन नियुक्ति के साथ ही मप्र भाजपा ने भविष्य को लेकर संकेत दे दिया है कि प्रदेश को उन नेताओं की आवश्यकता है जो पार्टी को अगले 15 से 20 वर्ष तक कुशल नेतृत्व, जमीनी संघर्ष और आम कार्यकर्ता से लगातार संपर्क स्थापित भी कर सकें। हालांकि उक्त नियुक्तियों से भाजपा के कई दिग्गज नेताओं में असंतोष भी व्याप्त है। ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि नए नियुक्त हुए इन अध्यक्षों को दिग्ग्जों का साथ व मार्गदर्शन न मिले। पार्टी के आलाकमान व प्रदेश अध्यक्ष भी इस बात से अनभिज्ञ नहीं है। इसको देखते हुए संभव है कि पार्टी ने नव नियुक्त अध्यक्षों को पावर बूस्टर शॉट देने की तैयारी भी कर ली हो। पार्टी यदि ऐसा नहीं करती है तो संभव है कि नया प्रयोग असफल भी हो जाए। बहरहाल कई राजनीतिक बुद्धिजीवियों ने इस नई नीति को लेकर विचार करना भी प्रारंभ कर दिया है।

किसी भी नई नीति का निर्धारण करने से पहले उसका अध्ययन आवश्यक होता है, जिसे मैनेजमेंट की भाषा में 'स्वॉट (SWOT) अनालिसिस' कहते हैं। स्वॉट अनालिसिस एक प्रकार से आत्मविश्लेषण करने की तकनीक है, जिसे बड़ी बड़ी संस्थाओं द्वारा अकसर किया जाता है। इसमें लिए जाने वाले निर्णय या नीति के संबंध में उससे जुड़े चार पहलुओं पर विचार किया जाता है जिसमें S का मतलब है स्ट्रेंथ (ताकत), W का मतलब है वीकनेस (कमजोरी, अवगुण), O का मतलब है अपॉर्चुनिटी (सुअवसर) एवं T का मतलब है थ्रेट (बाधाएं)। युवाओं को मौका देने के पार्टी के इस निर्णय व नीति को समझने का प्रयास करते हैं।

S — स्ट्रेंथ अर्थात ताकत:
मप्र भाजपा के इस निर्णय से पार्टी की ताकत बढ़ने का पूरा अनुमान है। युवा अध्यक्ष जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ सहजता से जुड़े होते हैं। दिग्गज नेताओं, पार्टी आलाकमान, संगठन पदाधिकारियों और आम कार्यकर्ताओं के बीच सेतु का काम करते हैं। जमीनी मुद्दों और समस्याओं को निपटाने के लिए बड़े ब़डे नेताओं को इन्हीं की आवश्यकता होती है। युवा होने के कारण यह नए बदलाव व नई तकनीक को सहजता के साथ अपना लेते हैं।

W — वीकनेस अर्थात् कमजोरी:
युवा होने के लाभ हैं तो कुछ कमजोरियां भी ​होती हैं। इनमें प्रमुख है कम अनुभव के कारण नीतिगत निर्णय लेने में निपुण न होना। विषम परिस्थितियों में धैर्य धारण करने की संभावना भी कम होती है। ज्यादा प्रखर होना कभी कभी हानि भी पहुंचा सकता है। किन्तु इन कमजोरियों को दूर करने के लिए पार्टी में मागदर्शक मंडल भी होता है।

O — अपॉर्चुनिटी अर्थात सुअवसर:
पार्टी के लिए युवाओं को मौका देना एक प्रकार से सुअवसर भी है। चूंकि यह युवा हैं और राजनीतिक पारी काफी लंबी है, इसलिए पार्टी को आगामी पंद्रह से बीस वर्षों तक सक्रिय नेता के रुप में लाभ प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं। इससे आने वाले समय में पार्टी के पास नेतृत्व क्षमता वाले नेताओं की कमी नहीं होगी। प्रदेश में 15 वर्षों तक लगातार सत्ता में रही पार्टी  के कई नेता अब 60 वर्ष से उपर के हैं। इनका राजनीतिक भविष्य अब ज्यादा लंबा नहीं है। साथ ही कुछ पुराने नेताओं ने अपने अपने गुट भी बना लिए हैं। जिसका नुकसान पार्टी को आगे आने वाले समय में उठाना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए युवाओं को मौका देने से पार्टी को भविष्य के लिए कई विकल्प भी मिलेंगे, जो गुटबाजी करने वाले नेताओं से टक्कर ले सकेंगे व पार्टी को नई उंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

T — थ्रेट अर्थात् बाधाएं व खतरा:
पार्टी के इस निर्णय से कई नेता असहज भी हुए हैं। पूरी संभावना है कि ऐसे ही नेता पार्टी के इस निर्णय के लिए खतरा साबित हों। इसके अलावा पार्टी के वो दिग्गज भी एक प्रकार से खतरा साबित होंगे जो अपने पुत्र मोह के चलते जिलों में किसी होनहार व लायक युवा नेता को आगे आने नहीं दे रहे हैं। वहीं विपक्ष ऐसे नेताओं का बाहें फैलाकर स्वागत करने को आतुर है। पार्टी ने इस खतरे को पहचान कर दूर करने के लिए भी कोई न कोई रणनीति अवश्य बनाई होगी।

Related News

मप्र को महाराज दे सकते थे तीसरा राजनीतिक विकल्प

Apr 30, 2020

मामा, राजा और महाराजा   प्रवेश गौतम। कोरोना महामारी के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री व मंत्री घरों में लॉक डाउन हैं। पूरी संभावना है कि इस दौरान यह सभी 15 महीनों के कार्यकाल पर आत्म मंथन भी कर रहे होंगे। तो वहीं कुछ राजनेता आगामी विधानसभा उपचुनाव को जीतने की रणनीति पर भी विचार कर रहे होंगे। परंतु इन राजनेताओं को सत्तासीन करवाने वाली मध्यप्रदेश की आम जनता तो केवल अपनी जीविका के बारे...

Comment