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कंगाल हो चुके प्रदेश में भाजपा का झूठ

आलेख Oct 30, 2018       757
कंगाल हो चुके प्रदेश में भाजपा का झूठ

प्रवेश गौतम, भोपाल। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मप्र भाजपा ने अपने चुनावी कैंपेन के लिए 'समृद्ध मध्यप्रदेश' नाम से अभियान शुरु किया है। भाजपा का दावा है कि उसकी सरकार ने 15 सालों में मप्र को बीमारू राज्य से विकसित बना दिया है। अब लोगों से वोट मांगते हुए कहा जा रहा है कि प्रदेश को समृद्ध राज्य बनाएंगे। इसको लेकर व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। इसके लिए बकायदा एक नंबर का प्रचार भी किया जा रहा है।

भाजपा के दावे की पोल इसी बात से खुल गई है कि पिछले लगभग तीन महीनों से कई विभागों के कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिला है। इसके अलावा ऐसे कई कार्यों के भुगतान भी नहीं हो पा रहे हैं जो आमजन के रोजमर्रा से जुड़ा है। यह जानना भी जरूरी है कि मप्र में 1.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। इतना ही नहीं, सरकार को बाजार से भी कर्ज उठाना पड़ रहा है।

यदि प्रदेश विकसित हो गया है तो ऐसे में सरकार पर कर्ज क्यों है? वहीं हर तीन महीने में सरकार को बाजार से कर्ज क्यों लेना पड़ र​हा है। प्रदेश के कई विभागों की ऐसी हालत है कि वहां काम करने वाले कर्मचारी को महीनों से वेतन का भु्गतान ही नहीं हो पा रहा है।

प्रदेश का जो भी हाल किया हो, लेकिन इतना जरूर है कि पार्टी की माली हालत जरूर बेहतर हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि प्रदेश का विकास हुआ है या भाजपा का? भाजपा के हाईटेक कार्यालय जिनमें फाइव स्टार जैसी सुविधा वाले कमरे आदि की पूरी सुविधा है।

प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उद्योगों के बुरे हाल है। किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। कई गावों में शुद्ध पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सड़कों का यह हाल है की एक साल में ही बड़े बड़े गड्ढे हो जाते हैं।

दूर की बात छोड़ो, राजधानी भोपाल की सड़कों का हाल किसी से छुपा नहीं है। जेके रोड हो या कोलार जाने के लिए दानिश कुंज की रोड, 365 दिनों में से 250 दिन इनमें गड्ढे ही मिलते हैं। शिकायत करो तो सरकार चूरा गिट्टी डालकर पल्ला झाड़ लेती है। नालों की हालत यह है कि हर साल बारिश में बाढ़ के हालात बनते हैं। बारिश बंद होने के बाद सड़कों में धूल की इतनी मात्रा बढ़ जाती है कि लागों के फेंफड़े भी रो देते हैं। वहीं शहर में लगातार बढ़ रही गुमटी उद्योग किसी से छुपा नहीं है। गुमटियों में स्नातक तक पढ़ाई कर चुके युवा चाय समोसे बेच रहे हैं।

रोजगार के लिए बनाए गए व्यावसायिक परीक्षा मंडल :व्यापमं: को ही ले लीजिए। बदनामी इतनी हुई कि सरकार को इसका नाम बदलकर प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड रखना पड़ा। आए दिन परिक्षाओं को निरस्त किया जा रहा है। जो परिक्षाएं हो भी रहीं है तो उनके परिणाम सालों तक नहीं आते। ऐसी कई मिसालें हैं जो प्रदेश की हकीकत खोलती है।

बावजूद इसके भाजपा को झूठ बोलने के अलावा कुछ नहीं आता। एक सवाल जरूर उठता है कि प्रदेश में जब बेरोजगारी बढ़ रही है, उद्योगों के बुरे हाल हैं, शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी लोगों को तरसना पड़ता है, ऐसे में मध्यप्रदेश विकसित कब हुआ, जो उसे समृद्ध बनाएंग?

प्रोपेगेंडा करने में माहिर भाजपा के पास इन सब बातों का कोई ठोस जवाब नहीं है। हालांकि बात करेंगे तो 15 साल पीछे की कहानी सुनाएंगे। मान लीजिए कि कांगेस ने कुछ नहीं किया था, फिर भी भाजपा के पास 15 साल थे। बावजूद इसके प्रदेश को समृद्ध बनाने की बात हो रही है। गजब है, भाई। हंसी आती है और दया भी।

कैलाश विजयवर्गीय ने साधी चुप्पी
हाल ही में भाजपा के हाईटेक मीडिया सेंटर में एक पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि प्रदेश में कई लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है और मध्यप्रदेश विकसित राज्यों की श्रेणी में आता हैं। प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए प्रयास किया जाएगा। जब कैलाश विजयवर्गीय से मध्यप्रदेश में 1.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने चुप्पी साध ली। ऐसे में सवाल उठता है कि तार्किक प्रश्नों के लिए क्या भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है?

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