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डीआरएम कार्यालय में पनौती का कमरा, 6 महीने में कर देता है बाहर !

Exclusive Jun 02, 2020       3664
डीआरएम कार्यालय में पनौती का कमरा, 6 महीने में कर देता है बाहर !

प्रवेश गौतम (द करंट स्टोरी)। पनौती शब्द सुनकर कुछ अटपटा लगता है। लेकिन भोपाल रेल मंडल में यह शब्द जाने अनजाने सामने आ ही जाता है। इसी के चलते पूर्व में मंडल के कंट्रोल रूम में गृह शांति हवन भी करवाया गया था। अब इसे अंधविश्वास कहें या फिर पनौती (अपशकुन) दूर करने का प्रयास या फिर श्रद्धा। हालांकि इस बार पनौती की चर्चा एक कमरे को लेकर है। दरअसल, भोपाल रेल मंडल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय में एक ऐसा कमरा है जिसे कुछ लोग पनौती कह कर पुकारने लगे हैं।

डीआरएम कार्यालय के भूतल में स्थित एक कमरा है, जिसके बारे में यह धारणा बनने लगी है कि, 6 महीने (औसतन) से ज्यादा कोई भी अधिकारी यहां टिक नहीं सकता। प्रथम दृष्टया यह पूर्णतः अंधविश्वास प्रतीत होता है लेकिन आंकड़ो पर नज़र डालें तो यह सच साबित होता भी दिख रहा है। इस कमरे में बैठने वाले तीन अधिकारियों का तबादला मंडल से बाहर हो चुका है। वो भी लगभग डेढ़ वर्षों में, अर्थात औसतन 6 महीने से ज्यादा कोई भी टिक नहीं पाया। जबकि इस पद पर पहले चार से पांच साल तक अधिकारी टिके रहते थे।

डीआरएम कार्यालय के भूतल में वाणिज्य शाखा संचालित होती है। इसी शाखा के वरिष्ठतम शाखा अधिकारी यानी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) के चैम्बर (कमरा) को लेकर इस तरह की चर्चा है।

व्यवधान न हो, इसलिए बनवाया था चैम्बर  
वाणिज्य शाखा में पदस्थ तत्कालीन सीनियर डीसीएम विनोद तामोरी ने बैठने की व्यवस्था बदली थी। पहले, कार्यालय में प्रवेश करते ही उनका चैम्बर था, जिससे हर आगंतुक सीधे उनके चैम्बर का दरवाजा खटखटा देता था। तब उन्होंने व्यवस्था में बदलाव करते हुए वरीयता के आधार पर अपना चैम्बर कॉरिडोर के अंत मे बनवाया था। हालांकि इस चैम्बर में बैठने के 6 महीने बाद ही उनका तबादला ऑपरेटिंग शाखा में हो गया था। उनके बाद अनुराग पटेरिया जी को सीनियर डीसीएम बनाया गया, लेकिन उनका तबादला भी लगभग 6 महीने में जबलपुर हो गया। दिसंबर 2019 में नवदीप अग्रवाल बतौर सीनियर डीसीएम पदस्थ हुए। लेकिन इनका भी मई 2020 में तबादला हो गया। हालांकि अभी तक इन्हें रिलीव नहीं किया गया है।

नहीं किया वास्तुदोष का निवारण !
मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि, उक्त चैम्बर में वास्तुदोष की बात भी सामने आई थी। तब कहा गया कि यह सब अंधविश्वास है। लेकिन अब दबी जुबान यह चर्चा है कि उक्त चैम्बर में वाकई कोई न कोई वास्तुदोष है, जिसका निवारण करना अनिवार्य है। अन्यथा नए आने वाले साहब का भी कहीं 6 महीने में तबादला न हो जाए।


अधिकारी                चैम्बर में प्रवेश         तबादला
विनोद तामोरी   -    जनवरी 2019           मई 2019
अनुराग पटेरिया -    मई 2019             दिसंबर 2019
नवदीप अग्रवाल -    दिसंबर 2019          मई 2020

डीआरएम ने करवाया था शांति हवन
भोपाल डीआरएम कार्यालय में पनौती, अंधविश्वास व अपशकुन जैसी चर्चा नई नहीं हैं। पूर्व में भी दो डीआरएम वास्तुदोष निवारण सहित शांति हवन करवा चुके हैं। तत्कालीन डीआरएम आलोक कुमार अपने कार्यकाल के दौरान दो बड़े हादसों (इटारसी में आरआरआई अग्निकांड व हरदा ट्रेन हादसा) के बाद कंट्रोल रूम में शांति हवन करवाया था। वहीं 90 के दशक में डीआरएम रहे कमलजीत सिंह ने भी शांति के लिए हवन करवाया था। इसके अलावा कई अधिकारियों ने भी वास्तुविद की सलाह पर अपने चैम्बर में बदलाव करवाए थे।

इनका कहना है:
कार्यालय में भी वास्तुदोष हो सकता है, जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव काम पर पड़ता है। हालांकि शास्त्रों अनुसार वास्तुदोष निवारण के लिए कई उपाय होते हैं, जिन्हें करने से दोष कट जाता है।
 -राजेश सोनी, वरिष्ठ वास्तुविद, भोपाल

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