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2018 में रेलवे ने एफओबी को कहा था फिट, फिर भी हो गया हादसा

Exclusive Feb 14, 2020       2190
2018 में रेलवे ने एफओबी को कहा था फिट, फिर भी हो गया हादसा

दो प्रकार की निरीक्षण रिपोर्ट में नही मिली थी कोई कमी
संयुक्त जांच रिपोर्ट में अधिकारी ने हस्ताक्षर करने से किया मना

प्रवेश गौतम, भोपाल। गुरुवार को भोपाल रेलवे स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज का स्लैब गिरने की घटना ने रेलवे के संरक्षा दावों की पोल खोल दी है। इस हादसे को केवल एक दुर्घटना बताकर मामले से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि इस हादसे के पीछे भोपाल रेल मंडल के इंजीनियरिंग शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही है, जिन्होंने पुल की दो निरीक्षण रिपोर्ट में केवल खानापूर्ति करके सबकुछ सही बताया था।

द करंट स्टोरी को रेलवे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उक्त एफओबी का दिसंबर 2018 के बाद से कोई निरीक्षण नहीं किया गया था। इंजीनियरिंग शाखा के निरीक्षण रजिस्टर में 27 दिसंबर 2018 के बाद से कोई भी निरीक्षण दर्ज नहीं है। उक्त निरीक्षण रिपोर्ट को सीनियर डिविजनल इंजीनियर सेंट्रल ने जुलाई 2019 में देखकर संतुष्टि जताई थी। उसके बाद से आज दिनांक तक इस रजिस्टर में कोई भी प्रविष्टि नहीं है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि रेलवे अधिकारियों ने पूरी तरह से लापरवाही की है।

16 को हुआ निरीक्षण, 15 को कर दी प्रविष्टि
पुल के लोहे व स्टील की निरीक्षण के लिए बने, 'स्ट्रक्चरल स्टील एंड टिंबर वर्क इंस्पेक्शन रजिस्टर' में भी गड़बड़ी की आशंका है। इस रजिस्टर में 15 मार्च 2019 को 'एज पर इंस्पैक्शन रिपोर्ट' लिखा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इस रजिस्टर में जिस रिपोर्ट का उल्लेख है वह सहायक मंडल अभियंता कार्य भोपाल विनय कुमार पांडे ने 16 मार्च को बनाई थी, जिसमें पुल में कोई भी खामी नहीं पाई गई थी। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि 15 मार्च को कौन सी रिपोर्ट बनाई गई थी। यदि 15 मार्च को रिपोर्ट बनी थी तो वह कहां है। 16 मार्च वाली निरीक्षण रिपोर्ट की प्रविष्टि कहां की गई है। इन सवालों के जवाब तलाशे जाएं तो संभवत: इंजीनियरिंग शाखा के जिम्मेदार अधिकारी संदेह के घेरे में आ जाएंगे।

इंजीनियरिंग शाखा को माना जिम्मेदार, अधिकारियों ने हस्ताक्षर करने से किया मना
हादसें के बाद रेलवे द्वारा एक प्रांरभिक संयुक्त जांच रिपोर्ट बनाई गई, जिसमें इंजीनियरिंग के दो अधिकारियों (एन के राजपूत एवं बीके मिश्रा) एवं आरपीएफ इंस्पेक्टर (एमआई मंसूरी) ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। दोनो इंजीनियरों ने इस रिपोर्ट पर लिखित असहमति व्यक्त की है। हस्ताक्षर न करने का कारण बताते हुए दोनो इंजीनियरों ने लिखा है कि पुल में कोई भी असामान्यता नहीं पाई गई है एवं यह एक दुर्घटना है जो कि वेल्डिंग ज्वाइंट के शियर टूटने से हुई है। वहीं आरपीएफ इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट को सही न मानते हुए उसे बदलने का कहकर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस संयुक्त जांच रिपोर्ट में ज्वाइंट टूटने को हादसे का कारण माना गया है जिसके लिए इंजीनियरिंग शाखा जिम्मेदार है। इस रिपोर्ट में एमजेखान (सीएलआई, भोपाल), एसएल मीणा (ट्रेफिक इंस्पेक्टर, भोपाल) एवं वाय एस बघेल (स्टेशन प्रबंधक भोपाल) के हस्ताक्षर हैं।

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