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राष्ट्रप्रेमी का सर्टिफिकेट चाहिए, कहां मिलेगा?

आलेख Sep 28, 2018       2278
राष्ट्रप्रेमी का सर्टिफिकेट चाहिए, कहां मिलेगा?

द करंट स्टोरी। हाल ही में 26 सितंबर को मध्यप्रदेश के मंदसौर शहर के एक कॉलेज में प्राध्यापक को छात्रों के पैर छूकर मांफी मांगनी पड़ी। वि​डीयों सोशल मीडीया में वायरल हो गया और कई समाचार पत्रों एवं चैनलों ने इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया व दिखाया। मामला एक नारे को लेकर बोलने से जुड़ा है। इसके बाद मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के दिमाग में एक ही सवाल उठ रहा है, कि देशभक्त या राष्ट्रप्रेमी होने का सर्टिफिकेट कहां मिलेगा और कौन देगा? क्योंकि प्राध्यापक पर छात्रों के ए​क संगठन ने देशद्रोह का आरोप लगा दिया था।

पिछले लगभग 4 सालों से संपूर्ण देश में सत्ताधारी पार्टी द्वारा एक ही बात को लेकर जोर दिया जा रहा है कि समस्त विपक्षी दलों में राष्ट्रप्रेम नहीं है। वहीं सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने पूर्व की सरकारों पर विदेशियों के साथ सांठगांठ करने का आरोप भी लगाया। य​दि किसी ने गिरते रुपए और महंगे होते पेट्रोल-डीजल पर गलती से कुछ बोल भी दिया तो, सत्ताधारी पार्टी के लोग एवं कार्यकर्ता ऐसे व्यक्ति को विपक्षी का तोता बोलने से नहीं चूकते, यहां तक कि फेसबुक जैसे सोशल साइट्स में तो कई बार विरोध करने पर देशप्रेमी होने पर भी सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। राफेल, व्यापमं, ईटेण्डरिंग जैसे मुद्दों को तो आप भूल ही जाइए।

लगातार झूठ बोलने पर भी कोई सवाल नहीं, पर यदि सच बोला तो आप दो मिनट के अंदर देशद्रोही या विपक्षी पार्टियों के तोता करार दे दिए जाएंगे। इन सब बातों को सुनकर तो ऐसा लगने लगा है कि कुछ भी बोलने से पहले देशभक्त या राष्ट्रप्रेमी का सर्टिफिकेट लेना आवश्यक है। यह कहां मिलेगा कोई बता सकता है क्या?

बहरहाल, मंदसौर के प्राध्यापक ने एक छात्र संगठन के नेताओं को कॉलेज परिसर में नारे लगाने से रोका था। क्या प्राध्यापक की इसमें कोई गलती थी? संभ्ज्ञवत: उन्होंने तो शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले संस्थान में अनुशासन को बरकरार रखने के लिए नारे लगाने से रोका होगा। ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मामला है। देश की सत्ताधारी पार्टी भी उनका विरोध करने पर कुछ ऐसा ही करती है। कॉलेज परिसर को पार्टी का अखाड़ा बनाने में किसी भी राजनैतिक दल ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। तो क्या हमारे शिक्षा के मंदिरों को सत्ताधारी पार्टी की गाइडलाइन के अनुसार चलना पड़ेगा, नहीं तो छात्र नेता कोहराम मचा देंगे।

हमें और आपको मिलकर सोचना होगा कि क्या वाकई में छात्रों को राष्ट्रप्रेम या देशभक्त बनाया जा रहा है या फिर पार्टी विशेष की भविष्य की सेना खड़ी की जा रही है। खैर ऐसा नहीं है कि यह ​केवल पिछले चार सालों में ही हुआ हो। पहले भी ऐसा होता रहा है। छात्र राजनीति ने देश को कई बड़े नेता दिए हैं, लेकिन पूर्व में छात्र नेता मुद्दों की लड़ाई लड़ते थे और छात्रों के भविष्य को लेकर आंदोलन करते थे। लेकिन अब परिवेश बदल रहा है, मास्साहब जी, आप भी नारे लगाने दीजिए और रोक टोक मत करिए। और हमें भी मार्गदर्शन दीजिए कि 'राष्ट्रप्रेमी या देशभक्त का सर्टिफिकेट कहां मिलेगा?

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